लङ्काकाण्ड · दोहा 98 · दोहा
मुरुछा बिगत भालु कपि सब आए प्रभु पास।
मुरुछा बिगत भालु कपि सब आए प्रभु पास।
निसिचर सकल रावनहि घेरि रहे अति त्रास॥ ९८॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.98 · पुस्तक पृ. 872, 873
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मुरुछा बिगत भालु कपि सब आए प्रभु पास।
मूर्छा दूर होने पर सभी भालु और वानर प्रभु राम के पास आए।
English explanation
Once their unconsciousness had passed, all the bears and monkeys came to Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुरुछा | मूर्छा | unconsciousness |
| बिगत | दूर होने पर | having passed |
| भालु | भालु | bears |
| कपि | वानर | monkeys |
| सब | सभी | all |
| आए | आए | came |
| प्रभु | प्रभु राम के | Lord Rama’s |
| पास | पास | presence |
2निसिचर सकल रावनहि घेरि रहे अति त्रास॥ ९८॥
सभी राक्षस अत्यंत भयभीत होकर रावण को घेरे रहे।
English explanation
All the demons remained gathered around Ravana in great fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसिचर | राक्षस | demons |
| सकल | सभी | all |
| रावनहि | रावण को | Ravana |
| घेरि | घेरकर | surrounding |
| रहे | रहे | remained |
| अति | अत्यंत | great |
| त्रास | भय में | in fear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 98
- स्रोत अभिलेख
- 6.98
- सहायक विषय
- घोर युद्ध, रावणकी मूर्च्छा
- मुद्रित पृष्ठ
- 872, 873
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