लङ्काकाण्ड · दोहा 97 · दोहा
तब रघुपति रावन के सीस भुजा सर चाप।
तब रघुपति रावन के सीस भुजा सर चाप।
काटे बहुत बढ़े पुनि जिमि तीरथ कर पाप॥ ९७॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.97 · पुस्तक पृ. 871, 871
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तब रघुपति रावन के सीस भुजा सर चाप।
तब रघुपति राम ने रावण के सिर, भुजाएँ, बाण और धनुष—
English explanation
Then Rama, lord of the Raghu line, cut Ravana’s heads, arms, arrows, and bows—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम ने | Rama, lord of the Raghu line |
| रावन | रावण | Ravana, the demon king |
| के | के | belonging to |
| सीस | सिर | heads |
| भुजा | भुजाएँ | arms |
| सर | बाण | arrows |
| चाप | धनुष | bows |
2काटे बहुत बढ़े पुनि जिमि तीरथ कर पाप॥ ९७॥
बहुत बार काटे; फिर भी सिर और भुजाएँ फिर बढ़ गईं, जैसे तीर्थ में किया गया पाप बढ़ता है।
English explanation
He cut them repeatedly; yet the heads and arms grew back, just as sin committed at a pilgrimage site increases.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काटे | काट दिए | cut off |
| बहुत | बहुत बार | many times |
| बढ़े | फिर बढ़ गए | grew back |
| पुनि | फिर | again |
| जिमि | जैसे | just as |
| तीरथ | तीर्थस्थल में | at a pilgrimage site |
| कर | का, वहाँ किया गया | committed there |
| पाप | पाप | sin |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 97
- स्रोत अभिलेख
- 6.97
- सहायक विषय
- घोर युद्ध, रावणकी मूर्च्छा
- मुद्रित पृष्ठ
- 871, 871
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।