लङ्काकाण्ड · दोहा 96 · दोहा
सुर बानर देखे बिकल हँस्यो कोसलाधीस।
सुर बानर देखे बिकल हँस्यो कोसलाधीस।
सजि सारंग एक सर हते सकल दससीस॥ ९६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.96 · पुस्तक पृ. 869, 870
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुर बानर देखे बिकल हँस्यो कोसलाधीस।
देवताओं और वानरों को व्याकुल देखकर कोसलपति राम हँसे।
English explanation
Seeing the gods and monkeys distressed, Rama, the lord of Kosala, laughed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवताओं को | the gods |
| बानर | वानरों को | the monkeys |
| देखे | देखकर | on seeing |
| बिकल | व्याकुल; घबराए हुए | distressed; alarmed |
| हँस्यो | हँसे | laughed |
| कोसलाधीस | कोसल के स्वामी राम | Rama, lord of Kosala |
2सजि सारंग एक सर हते सकल दससीस॥ ९६॥
धनुष तैयार करके राम ने एक ही बाण से सभी मायामय दसशीश रावणों को मार गिराया।
English explanation
Readying his bow, Rama struck down all the illusory ten-headed Ravanas with a single arrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सजि | तैयार करके; सँभालकर | having readied; taking up |
| सारंग | राम का धनुष | Rama’s bow |
| एक | एक ही | a single |
| सर | बाण से | with an arrow |
| हते | मार गिराए | struck down; slew |
| सकल | सभी | all |
| दससीस | दस सिर वाले मायामय रावणों को | the illusory ten-headed Ravanas |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 96
- स्रोत अभिलेख
- 6.96
- सहायक विषय
- रावण-हनुमान्-युद्ध, रावणका माया रचना, रामजीद्वारा माया-नाश
- मुद्रित पृष्ठ
- 869, 870
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