लङ्काकाण्ड · दोहा 95 · दोहा
तब रघुबीर पचारे धाए कीस प्रचंड।
तब रघुबीर पचारे धाए कीस प्रचंड।
कपि बल प्रबल देखि तेहिं कीन्ह प्रगट पाषंड॥ ९५॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.95 · पुस्तक पृ. 868, 869
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तब रघुबीर पचारे धाए कीस प्रचंड।
तब श्रीराम ने ललकारकर पुकारा, और प्रचंड वानर दौड़ पड़े।
English explanation
Then Rama called out a challenge, and the formidable monkeys rushed forward.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर श्रीराम ने | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| पचारे | ललकारकर पुकारा | called out a challenge |
| धाए | दौड़ पड़े | rushed forward |
| कीस | वानर | monkeys |
| प्रचंड | प्रचंड वीर | formidable |
2कपि बल प्रबल देखि तेहिं कीन्ह प्रगट पाषंड॥ ९५॥
वानरों की सेना को प्रबल देखकर रावण ने अपना मायावी छल प्रकट किया।
English explanation
Seeing the monkey army’s might, Ravana displayed his deceptive magic.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपि | वानरों की | of the monkeys |
| बल | सेना | army |
| प्रबल | शक्तिशाली | mighty |
| देखि | देखकर | having seen |
| तेहिं | उसने, अर्थात् रावण ने | he, namely Ravana |
| कीन्ह | किया | made |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| पाषंड | मायावी छल | deceptive magic |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 95
- स्रोत अभिलेख
- 6.95
- सहायक विषय
- रावण-हनुमान्-युद्ध, रावणका माया रचना, रामजीद्वारा माया-नाश
- मुद्रित पृष्ठ
- 868, 869
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