लङ्काकाण्ड · दोहा 94 · दोहा
उमा बिभीषनु रावनहि सन्मुख चितव कि काउ।
उमा बिभीषनु रावनहि सन्मुख चितव कि काउ।
सो अब भिरत काल ज्यों श्रीरघुबीर प्रभाउ॥ ९४॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.94 · पुस्तक पृ. 867, 868
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1उमा बिभीषनु रावनहि सन्मुख चितव कि काउ।
हे उमा, क्या विभीषण कभी रावण के सामने होकर उसकी ओर देख भी सकते थे?
English explanation
Uma, could Vibhishana ever have faced Ravana and even looked at him?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| बिभीषनु | विभीषण | Vibhishana, Ravana’s brother |
| रावनहि | रावण को | at Ravana |
| सन्मुख | सामने होकर | face-to-face |
| चितव | देखते; दृष्टि डालते | looked; cast a glance |
| कि | क्या | could; whether |
| काउ | कभी | ever |
2सो अब भिरत काल ज्यों श्रीरघुबीर प्रभाउ॥ ९४॥
वही विभीषण अब काल के समान उससे भिड़ रहे हैं—यह श्रीराम का प्रभाव है।
English explanation
That same Vibhishana now fights him like Death itself—such is the power of Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही विभीषण | that same Vibhishana |
| अब | अब | now |
| भिरत | भिड़ रहे हैं | is fighting |
| काल | काल; मृत्यु | Death |
| ज्यों | के समान | like |
| श्रीरघुबीर | श्रीराम का | of Lord Rama, the hero of Raghu’s lineage |
| प्रभाउ | प्रभाव; प्रताप | power; might |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 94
- स्रोत अभिलेख
- 6.94
- सहायक विषय
- रावणका विभीषणपर शक्ति छोड़ना, रामजीका शक्तिको अपने ऊपर लेना, विभीषण-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 867, 868
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।