लङ्काकाण्ड · दोहा 101 (क) · दोहा
ताके गुन गन कछु कहे जड़मति तुलसीदास।
ताके गुन गन कछु कहे जड़मति तुलसीदास।
जिमि निज बल अनुरूप ते माछी उड़इ अकास॥ १०१ क ॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.101 · पुस्तक पृ. 876, 878
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ताके गुन गन कछु कहे जड़मति तुलसीदास।
एआई प्रारूप: मंदबुद्धि तुलसीदास ने उनके गुणसमूह में से कुछ गुण कहे हैं।
English explanation
AI draft: Tulsidas, describing himself as dull-witted, has recounted a few of His many virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताके | उनके, अर्थात् श्रीराम के | His, referring to Rama |
| गुन | गुण | virtues |
| गन | समूह | multitude |
| कछु | कुछ | a few |
| कहे | कहे हैं; वर्णन किया है | have recounted |
| जड़मति | मंदबुद्धि | dull-witted |
| तुलसीदास | कवि तुलसीदास ने | Tulsidas, the poet |
2जिमि निज बल अनुरूप ते माछी उड़इ अकास॥ १०१ क ॥
जैसे मक्खी अपनी शक्ति के अनुसार आकाश में उड़ती है।
English explanation
Just as a fly flies in the sky according to its own strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | just as |
| निज | अपनी | its own |
| बल | शक्ति | strength |
| अनुरूप | के अनुरूप | in proportion to |
| ते | से; के अनुसार | according to |
| माछी | मक्खी | a fly |
| उड़इ | उड़ती है | flies |
| अकास | आकाश में | in the sky |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 101 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.101
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 876, 878
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