लङ्काकाण्ड · दोहा 101 (ख) · दोहा
काटे सिर भुज बार बहु मरत न भट लंकेस।
काटे सिर भुज बार बहु मरत न भट लंकेस।
प्रभु क्रीड़त सुर सिद्ध मुनि ब्याकुल देखि कलेस॥ १०१ ख ॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.101 · पुस्तक पृ. 876, 878
भावार्थ और शब्दार्थ
1काटे सिर भुज बार बहु मरत न भट लंकेस।
सिर और भुजाएँ बहुत बार काटे जाने पर भी वीर लंकापति रावण मर नहीं रहा है।
English explanation
Although his heads and arms have been cut off many times, the warrior Ravana, lord of Lanka, does not die.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काटे | काटे गए | were cut off |
| सिर | सिर | heads |
| भुज | भुजाएँ | arms |
| बार | बार | times |
| बहु | बहुत; अनेक | many |
| मरत | मरता है | dies |
| न | नहीं | not |
| भट | योद्धा; वीर | warrior |
| लंकेस | लंकापति रावण | Ravana, lord of Lanka |
2प्रभु क्रीड़त सुर सिद्ध मुनि ब्याकुल देखि कलेस॥ १०१ ख ॥
प्रभु राम लीला कर रहे हैं; यह क्लेश देखकर देवता, सिद्ध और मुनि व्याकुल हैं।
English explanation
Lord Rama continues his play; seeing this distress, the gods, perfected beings, and sages are distraught.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु श्रीराम | Lord Rama |
| क्रीड़त | क्रीड़ा कर रहे हैं | is engaging in play |
| सुर | देवता | gods |
| सिद्ध | सिद्धि प्राप्त पुरुष | perfected beings |
| मुनि | मुनि; ऋषि | sages |
| ब्याकुल | व्याकुल; चिंतित | distraught; anxious |
| देखि | देखकर | on seeing |
| कलेस | क्लेश; कष्ट | distress; suffering |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 101 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.101
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 876, 878
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।