लङ्काकाण्ड · दोहा 83 · दोहा
देखि पवनसुत धायउ बोलत बचन कठोर।
देखि पवनसुत धायउ बोलत बचन कठोर।
आवत कपिहि हन्यो तेहिं मुष्टि प्रहार प्रघोर॥ ८३॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.83 · पुस्तक पृ. 854, 855
भावार्थ और शब्दार्थ
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1देखि पवनसुत धायउ बोलत बचन कठोर।
यह देखकर पवनपुत्र हनुमान कठोर वचन बोलते हुए दौड़े।
English explanation
Seeing this, Hanuman, the wind-god's son, rushed forward, speaking harsh words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen this |
| पवनसुत | पवनदेव के पुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind-god |
| धायउ | दौड़े | rushed forward |
| बोलत | बोलते हुए | speaking |
| बचन | वचन | words |
| कठोर | कठोर | harsh |
2आवत कपिहि हन्यो तेहिं मुष्टि प्रहार प्रघोर॥ ८३॥
आते हुए हनुमान को रावण ने अत्यंत भयंकर मुक्के का प्रहार किया।
English explanation
As Hanuman approached, Ravana struck him with a terribly fierce blow of his fist.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवत | आते हुए | as he approached |
| कपिहि | वानर हनुमान को | Hanuman, the monkey warrior |
| हन्यो | मारा | struck |
| तेहिं | उस रावण ने | he, Ravana |
| मुष्टि | मुक्के का | of the fist |
| प्रहार | प्रहार | blow |
| प्रघोर | अत्यंत भयंकर | terribly fierce |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 83
- स्रोत अभिलेख
- 6.83
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 854, 855
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।