लङ्काकाण्ड · दोहा 84 · दोहा
उहाँ दसानन जागि करि करै लाग कछु जग्य।
उहाँ दसानन जागि करि करै लाग कछु जग्य।
राम बिरोध बिजय चह सठ हठ बस अति अग्य॥ ८४॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.84 · पुस्तक पृ. 855, 856
भावार्थ और शब्दार्थ
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1उहाँ दसानन जागि करि करै लाग कछु जग्य।
उधर रावण होश में आकर कोई यज्ञ करने लगा।
English explanation
Meanwhile, Ravana regained consciousness and began performing a certain sacrifice.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उहाँ | उधर, लंका में | there, in Lanka |
| दसानन | दस मुखों वाला रावण | Ravana, the ten-faced king |
| जागि | जागकर; होश में आकर | having regained consciousness |
| करि | करके | having done so |
| करै | करने | to perform |
| लाग | लगा | began |
| कछु | कोई; किसी प्रकार का | some; a certain |
| जग्य | यज्ञ | ritual sacrifice |
2 राम बिरोध बिजय चह सठ हठ बस अति अग्य॥ ८४॥
वह अत्यंत अज्ञानी मूर्ख, हठ के वश होकर, राम का विरोध करके विजय चाहता है।
English explanation
That utterly ignorant fool, ruled by obstinacy, seeks victory while opposing Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम | Rama |
| बिरोध | विरोध करके | while opposing |
| बिजय | विजय | victory |
| चह | चाहता है | desires |
| सठ | मूर्ख, रावण | the fool, Ravana |
| हठ | जिद; दुराग्रह | obstinacy |
| बस | वश में | under the sway of |
| अति | अत्यंत | extremely |
| अग्य | अज्ञानी | ignorant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 84
- स्रोत अभिलेख
- 6.84
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 855, 856
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।