लङ्काकाण्ड · दोहा 82 · दोहा
निज दल बिकल देखि कटि कसि निषंग धनु हाथ।
निज दल बिकल देखि कटि कसि निषंग धनु हाथ।
लछिमन चले क्रुद्ध होइ नाइ राम पद माथ॥ ८२॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.82 · पुस्तक पृ. 853, 853
भावार्थ और शब्दार्थ
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1निज दल बिकल देखि कटि कसि निषंग धनु हाथ।
अपने दल को व्याकुल देखकर लक्ष्मण ने कमर में तरकस कसा और हाथ में धनुष लिया।
English explanation
Seeing his own troops distressed, Lakshmana fastened his quiver at his waist and took his bow in hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | his own |
| दल | दल को | troops |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| देखि | देखकर | having seen |
| कटि | कमर में | at his waist |
| कसि | कसकर | having fastened |
| निषंग | तरकस | the quiver |
| धनु | धनुष | the bow |
| हाथ | हाथ में | in hand |
2लछिमन चले क्रुद्ध होइ नाइ राम पद माथ॥ ८२॥
लक्ष्मण क्रुद्ध होकर, राम के चरणों में सिर नवाकर चल पड़े।
English explanation
Lakshmana, filled with anger, bowed his head at Rama’s feet and set out.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| चले | चल पड़े | set out |
| क्रुद्ध | क्रोधित | angry |
| होइ | होकर | having become |
| नाइ | नवाकर | having bowed |
| राम | राम के | Rama’s |
| पद | चरणों में | at the feet |
| माथ | सिर | his head |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 82
- स्रोत अभिलेख
- 6.82
- सहायक विषय
- रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 853, 853
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