लङ्काकाण्ड · दोहा 81 · दोहा
निज दल बिचलत देखेसि बीस भुजाँ दस चाप।
निज दल बिचलत देखेसि बीस भुजाँ दस चाप।
रथ चढ़ि चलेउ दसानन फिरहु फिरहु करि दाप॥ ८१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.81 · पुस्तक पृ. 852, 852
भावार्थ और शब्दार्थ
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1निज दल बिचलत देखेसि बीस भुजाँ दस चाप।
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2रथ चढ़ि चलेउ दसानन फिरहु फिरहु करि दाप॥ ८१॥
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 81
- स्रोत अभिलेख
- 6.81
- सहायक विषय
- रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 852, 852
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