लङ्काकाण्ड · दोहा 80 (ग) · दोहा/सोरठा
उत पचार दसकंधर इत अंगद हनुमान।
उत पचार दसकंधर इत अंगद हनुमान।
लरत निसाचर भालु कपि करि निज निज प्रभु आन।।80(ग)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.8 · पुस्तक पृ. 850, 851
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 उत पचार दसकंधर इत अंगद हनुमान।
उधर दस सिर वाला रावण ललकार रहा था और इधर अंगद तथा हनुमान।
English explanation
On that side ten-headed Ravana was issuing challenges; on this side, Angada and Hanuman were doing so.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उत | उधर | on that side |
| पचार | ललकार रहा था | was challenging |
| दसकंधर | दस सिर वाला रावण | ten-headed Ravana |
| इत | इधर | on this side |
| अंगद | अंगद, बालि के पुत्र और राम के सहयोगी | Angada, Vali’s son and Rama’s ally |
| हनुमान | हनुमान, राम के भक्त और वानरवीर | Hanuman, Rama’s devotee and monkey warrior |
2 लरत निसाचर भालु कपि करि निज निज प्रभु आन।।80(ग)।।
राक्षस, भालू और वानर अपने-अपने स्वामी की दुहाई देकर लड़ रहे थे।
English explanation
The demons, bears, and monkeys fought, invoking the authority of their respective lords.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लरत | लड़ रहे थे | were fighting |
| निसाचर | राक्षस | demons |
| भालु | भालू | bears |
| कपि | वानर | monkeys |
| करि | करके; देकर | making; invoking |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने; प्रत्येक के अलग | respective |
| प्रभु | स्वामी की | of their lord |
| आन | दुहाई; प्रतिष्ठा की पुकार | invocation of authority or honor |
| ग | पद्य-संदर्भ का उपचिह्न ‘ग’ | verse-reference submarker ‘ग’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 80 (ग)
- स्रोत अभिलेख
- 6.8
- सहायक विषय
- रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 850, 851
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।