लङ्काकाण्ड · दोहा 80 (ख) · दोहा/सोरठा
सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज।
सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज।
एहि मिस मोहि उपदेसेहु राम कृपा सुख पुंज।।80(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.8 · पुस्तक पृ. 850, 851
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज।
प्रभु के वचन सुनकर विभीषण प्रसन्न हुए और उनके कमल-समान चरण पकड़ लिए।
English explanation
Hearing the Lord’s words, Vibhishana rejoiced and clasped his lotus-like feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| बचन | वचन | words |
| बिभीषन | विभीषण, राम के सहयोगी | Vibhishana, Rama’s ally |
| हरषि | हर्षित होकर | rejoicing |
| गहे | पकड़ लिए | clasped |
| पद | चरण | feet |
| कंज | कमल; कमल-समान | lotuses; lotus-like |
2 एहि मिस मोहि उपदेसेहु राम कृपा सुख पुंज।।80(ख)।।
हे कृपा और सुख के पुंज राम, आपने इस बहाने मुझे उपदेश दिया।
English explanation
Rama, embodiment of compassion and joy, you have instructed me through this occasion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| मिस | बहाने; अवसर से | occasion; pretext |
| मोहि | मुझे | me |
| उपदेसेहु | आपने उपदेश दिया | you instructed |
| राम | हे राम | O Rama |
| कृपा | करुणा | compassion |
| सुख | सुख; आनंद | joy; happiness |
| पुंज | भंडार; मूर्त समुच्चय | treasure; embodiment |
| ख | पद्य-संदर्भ का उपचिह्न ‘ख’ | verse-reference submarker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 80 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.8
- सहायक विषय
- रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 850, 851
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।