लङ्काकाण्ड · दोहा 79 · दोहा
दुहु दिसि जय जयकार करि निज निज जोरी जानि।
दुहु दिसि जय जयकार करि निज निज जोरी जानि।
भिरे बीर इत रामहि उत रावनहि बखानि॥ ७९॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.79 · पुस्तक पृ. 849, 850
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1दुहु दिसि जय जयकार करि निज निज जोरी जानि।
दोनों ओर जय-जयकार करके और अपने-अपने योग्य प्रतिद्वंद्वी पहचानकर,
English explanation
Raising victory cries on both sides and identifying their respective matches,
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दुहु | दोनों | both |
| दिसि | ओर | sides |
| जय | जय | victory |
| जयकार | जय का उद्घोष | cries of victory |
| करि | करके | having made |
| निज | अपना | their own |
| निज | अपना | respective |
| जोरी | बराबरी का प्रतिद्वंद्वी | matched opponent |
| जानि | पहचानकर | having recognized |
2भिरे बीर इत रामहि उत रावनहि बखानि॥ ७९॥
वीर आपस में भिड़ गए—इधर राम की और उधर रावण की प्रशंसा करते हुए।
English explanation
The warriors clashed, praising Rama on this side and Ravana on the other.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भिरे | भिड़ गए | clashed |
| बीर | वीर योद्धा | brave warriors |
| इत | इधर | on this side |
| रामहि | राम की | Rama |
| उत | उधर | on the other side |
| रावनहि | रावण की | Ravana |
| बखानि | प्रशंसा करते हुए | while praising |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 79
- स्रोत अभिलेख
- 6.79
- सहायक विषय
- रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 849, 850
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