लङ्काकाण्ड · दोहा 77 · दोहा/सोरठा
तब दसकंठ बिबिध बिधि समुझाईं सब नारि।
तब दसकंठ बिबिध बिधि समुझाईं सब नारि।
नस्वर रूप जगत सब देखहु हृदयँ बिचारि।।77।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.77 · पुस्तक पृ. 847, 848
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तब दसकंठ बिबिध बिधि समुझाईं सब नारि।
तब रावण ने सभी स्त्रियों को अनेक प्रकार से समझाया।
English explanation
Then Ravana consoled all the women in various ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| दसकंठ | दस कंठों वाला रावण | Ravana, the ten-necked king |
| बिबिध | विभिन्न | various |
| बिधि | तरीकों से | in ways |
| समुझाईं | समझाया, सांत्वना दी | consoled |
| सब | सभी | all |
| नारि | स्त्रियों को | the women |
2 नस्वर रूप जगत सब देखहु हृदयँ बिचारि।।77।।
हृदय में विचार करके देखो कि सारा जगत नश्वर स्वरूप का है।
English explanation
Reflect in your hearts and see that the entire world is perishable in nature.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नस्वर | नश्वर, नाशवान | perishable |
| रूप | स्वरूप वाला | in nature |
| जगत | जगत | world |
| सब | समूचा | entire |
| देखहु | देखो, समझो | see, recognize |
| हृदयँ | हृदय में | in your hearts |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 77
- स्रोत अभिलेख
- 6.77
- सहायक विषय
- मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 847, 848
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