लङ्काकाण्ड · दोहा 76 · दोहा/सोरठा
रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान।
रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान।
धन्य धन्य तव जननी कह अंगद हनुमान।।76।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.76 · पुस्तक पृ. 845, 847
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान।
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2 धन्य धन्य तव जननी कह अंगद हनुमान।।76।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 76
- स्रोत अभिलेख
- 6.76
- सहायक विषय
- मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 845, 847
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