लङ्काकाण्ड · दोहा 75 · दोहा/सोरठा
रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत।
रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत।
अंगद नील मयंद नल संग सुभट हनुमंत।।75।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.75 · पुस्तक पृ. 844, 845
भावार्थ और शब्दार्थ
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1रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत।
रघुपति के चरणों में सिर झुकाकर अनंत स्वरूप लक्ष्मण तुरंत चल पड़े।
English explanation
Bowing his head at Rama’s feet, Lakshman, identified here with Ananta, set out immediately.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | राम के | Rama’s |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| नाइ | झुकाकर | bowing |
| सिरु | सिर | his head |
| चलेउ | चल पड़े | set out |
| तुरंत | तुरंत | immediately |
| अनंत | अनंत शेष स्वरूप लक्ष्मण | Lakshman, identified with Ananta Shesha |
2 अंगद नील मयंद नल संग सुभट हनुमंत।।75।।
अंगद, नील, मयंद, नल और वीर हनुमान उनके साथ थे।
English explanation
Angad, Nil, Mayand, Nal, and the valiant Hanuman accompanied him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंगद | वानरवीर अंगद | Angad, a monkey warrior |
| नील | वानरवीर नील | Nil, a monkey warrior |
| मयंद | वानरवीर मयंद | Mayand, a monkey warrior |
| नल | वानरवीर नल | Nal, a monkey warrior |
| संग | साथ | along with him |
| सुभट | वीर योद्धा | valiant warrior |
| हनुमंत | हनुमान | Hanuman, Rama’s monkey ally |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 75
- स्रोत अभिलेख
- 6.75
- सहायक विषय
- मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
- मुद्रित पृष्ठ
- 844, 845
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