लङ्काकाण्ड · दोहा 22 (क) · दोहा/सोरठा
जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु।
जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु।
लोकपाल बल बिपुल ससि ग्रसन हेतु सब राहु।।22(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.22 · पुस्तक पृ. 792, 792
भावार्थ और शब्दार्थ
1जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु।
अरे जड़ जीव, मूर्ख वानर, बकवास मत कर; मेरी भुजाओं को देख!
English explanation
You witless creature, foolish monkey, stop prattling; look at my arms!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनि | मत | do not |
| जल्पसि | तुम बकवास करो | you prattle |
| जड़ | जड़; बुद्धिहीन | witless; dull |
| जंतु | जीव; प्राणी | creature |
| कपि | हे वानर | O monkey |
| सठ | मूर्ख; शठ | foolish; knavish |
| बिलोकु | देखो | look at |
| मम | मेरी | my |
| बाहु | भुजाएँ | arms |
2 लोकपाल बल बिपुल ससि ग्रसन हेतु सब राहु।।22(क)।।
मेरी ये सभी भुजाएँ लोकपालों के विशाल बलरूपी चंद्रमा को निगलने के लिए राहु के समान हैं।
English explanation
All these arms of mine are like Rahu, ready to swallow the moon that is the immense might of the guardians of the worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोकपाल | लोकों के रक्षक देवताओं का | of the divine guardians of the worlds |
| बल | बल; शक्ति | might; strength |
| बिपुल | विशाल; प्रचुर | immense; abundant |
| ससि | चंद्रमा | moon |
| ग्रसन | निगलने | swallowing |
| हेतु | के लिए | for; in order to |
| सब | सभी भुजाएँ | all the arms |
| राहु | राहु के समान | like Rahu, the eclipse-causing being |
| क | दोहा २२ का संदर्भ-चिह्न ‘क’ | reference marker ‘क’ for verse 22 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 22 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.22
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 792, 792
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।