लङ्काकाण्ड · दोहा 22 (ख) · दोहा/सोरठा
पुनि नभ सर मम कर निकर कमलन्हि पर करि बास।
पुनि नभ सर मम कर निकर कमलन्हि पर करि बास।
सोभत भयउ मराल इव संभु सहित कैलास।।22(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.22 · पुस्तक पृ. 792, 792
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 पुनि नभ सर मम कर निकर कमलन्हि पर करि बास।
फिर आकाशरूपी सरोवर में मेरे हाथों के समूहरूपी कमलों पर निवास करके—
English explanation
Then, resting upon the lotus-like cluster of my hands in the lake-like sky—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर; और भी | then; furthermore |
| नभ | आकाशरूपी | the sky as |
| सर | सरोवर | a lake |
| मम | मेरे | my |
| कर | हाथों | hands |
| निकर | समूह | cluster; multitude |
| कमलन्हि | कमलों | lotuses |
| पर | पर | upon |
| करि | करके | having made |
| बास | निवास; ठहराव | a dwelling; a resting place |
2 सोभत भयउ मराल इव संभु सहित कैलास।।22(ख)।।
शिव सहित कैलास पर्वत हंस के समान शोभित हुआ।
English explanation
Mount Kailasa, with Shiva upon it, shone like a swan.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोभत | शोभित; सुशोभित | resplendent; beautiful |
| भयउ | हुआ | became; was |
| मराल | हंस | a swan |
| इव | के समान | like |
| संभु | शिव | Shiva |
| सहित | सहित; साथ | together with |
| कैलास | कैलास पर्वत, शिव का निवास | Mount Kailasa, Shiva's abode |
| ख | दोहा २२ का संदर्भ-चिह्न ‘ख’ | reference marker ‘ख’ for verse 22 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 22 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.22
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 792, 792
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