लङ्काकाण्ड · दोहा 23 (क) · दोहा/सोरठा
सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ।
सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ।
फिरि न गयउ सुग्रीव पहिं तेहिं भय रहा लुकाइ।।23(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.23 · पुस्तक पृ. 793, 794
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ।
सच है, वानर ने स्वामी की आज्ञा पाए बिना नगर जला दिया।
English explanation
It is true: the monkey burned the city without receiving his lord’s permission.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्य | सच है | it is true |
| नगरु | नगर | the city |
| कपि | वानर ने | the monkey |
| जारेउ | जला दिया | burned |
| बिनु | बिना | without |
| प्रभु | स्वामी की | his lord’s |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| पाइ | पाए | receiving |
2 फिरि न गयउ सुग्रीव पहिं तेहिं भय रहा लुकाइ।।23(क)।।
फिर वह सुग्रीव के पास नहीं गया; उसी के डर से छिपा रहा।
English explanation
He did not return to Sugriva; out of fear of that, he remained in hiding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरि | लौटकर | back |
| न | नहीं | not |
| गयउ | गया | went |
| सुग्रीव | सुग्रीव | Sugriva |
| पहिं | के पास | to |
| तेहिं | उसी के | of that |
| भय | डर से | from fear |
| रहा | रहा | remained |
| लुकाइ | छिपा हुआ | hidden |
| क | पद-संदर्भ चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 23 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.23
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 793, 794
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