लङ्काकाण्ड · दोहा 73 · दोहा/सोरठा
गिरिजा जासु नाम जपि मुनि काटहिं भव पास।
गिरिजा जासु नाम जपि मुनि काटहिं भव पास।
सो कि बंध तर आवइ ब्यापक बिस्व निवास।।73।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.73 · पुस्तक पृ. 842, 843
भावार्थ और शब्दार्थ
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1गिरिजा जासु नाम जपि मुनि काटहिं भव पास।
हे पार्वती! जिनका नाम जपकर मुनि संसार के बंधन काट देते हैं—
English explanation
O Parvati, by chanting whose name sages cut the bonds of worldly existence—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरिजा | हे पार्वती, पर्वतराज की पुत्री! | O Parvati, daughter of the mountain king! |
| जासु | जिनका | whose |
| नाम | नाम | name |
| जपि | जपकर | by chanting |
| मुनि | मुनि; साधक ऋषि | sages |
| काटहिं | काट देते हैं | cut through |
| भव | संसार; जन्म-मरण के चक्र के | of worldly existence and rebirth |
| पास | पाश; बंधन | bonds |
2 सो कि बंध तर आवइ ब्यापक बिस्व निवास।।73।।
क्या वे सर्वव्यापी, विश्व के निवास-आधार प्रभु किसी बंधन के अधीन आ सकते हैं?
English explanation
Can that all-pervading Lord, the dwelling and support of the universe, ever come under bondage?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वे ही प्रभु | that very Lord |
| कि | क्या | can; is it possible that |
| बंध | बंधन के | of bondage |
| तर | नीचे; अधीन | under |
| आवइ | आते हैं; आ सकते हैं | comes; can come |
| ब्यापक | सर्वव्यापी | all-pervading |
| बिस्व | विश्व का | of the universe |
| निवास | निवास-स्थान; आधार | dwelling; sustaining abode |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 73
- स्रोत अभिलेख
- 6.73
- सहायक विषय
- मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
- मुद्रित पृष्ठ
- 842, 843
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