लङ्काकाण्ड · दोहा 72 · दोहा/सोरठा
मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास।।
मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास।।
गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास।।72।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.72 · पुस्तक पृ. 841, 842
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास।।
मेघनाद मायामय रथ पर चढ़कर आकाश में चला गया।
English explanation
Meghanada mounted a chariot fashioned by magical illusion and went into the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मेघनाद | रावण का पुत्र मेघनाद | Meghanada, Ravana’s son |
| मायामय | माया से निर्मित | fashioned by magical illusion |
| रथ | रथ पर | a chariot |
| चढ़ि | चढ़कर | having mounted |
| गयउ | चला गया | went |
| अकास | आकाश में | into the sky |
2 गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास।।72।।
वह अट्टहास करके गरजा, जिससे वानर-सेना को भय हुआ।
English explanation
He roared with loud, mocking laughter, striking fear into the monkey army.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गर्जेउ | गरजा | roared |
| अट्टहास | जोरदार उपहासपूर्ण हँसी | loud, mocking laughter |
| करि | करके | having made |
| भइ | हुआ | arose |
| कपि | वानरों की | of the monkeys |
| कटकहि | सेना को | in the army |
| त्रास | भय | fear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 72
- स्रोत अभिलेख
- 6.72
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 841, 842
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