लङ्काकाण्ड · दोहा 71 · दोहा
निसिचर अधम मलाकर ताहि दीन्ह निज धाम।
निसिचर अधम मलाकर ताहि दीन्ह निज धाम।
गिरिजा ते नर मंदमति जे न भजहिं श्रीराम॥ ७१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.71 · पुस्तक पृ. 839, 840
भावार्थ और शब्दार्थ
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1निसिचर अधम मलाकर ताहि दीन्ह निज धाम।
उस अधम, पापों के भंडार राक्षस को भी श्रीराम ने अपना धाम दिया।
English explanation
Rama granted his own abode even to that vile demon, a repository of impurity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसिचर | राक्षस; रात में विचरने वाला | demon; night-roamer |
| अधम | अत्यंत नीच | vile; base |
| मलाकर | मल अर्थात् पापों और अशुद्धि का भंडार | a repository of impurity and sin |
| ताहि | उसको | to him |
| दीन्ह | दिया; प्रदान किया | gave; granted |
| निज | अपना | his own |
| धाम | धाम; दिव्य निवास | abode; divine dwelling |
2गिरिजा ते नर मंदमति जे न भजहिं श्रीराम॥ ७१॥
हे गिरिजा, वे मनुष्य मंदबुद्धि हैं जो श्रीराम का भजन नहीं करते।
English explanation
O Girija, those people who do not worship Rama are dull of understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरिजा | हे पार्वती, हिमालय की पुत्री | O Parvati, daughter of the mountain |
| ते | वे | those |
| नर | मनुष्य | people |
| मंदमति | मंदबुद्धि; अल्प समझ वाले | dull of understanding |
| जे | जो | who |
| न | नहीं | not |
| भजहिं | भजन या उपासना करते हैं | worship; practice devotion to |
| श्रीराम | भगवान राम को | Lord Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 71
- स्रोत अभिलेख
- 6.71
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 839, 840
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