लङ्काकाण्ड · दोहा 70 · दोहा/सोरठा

करि चिक्कार घोर अति धावा बदनु पसारि।

करि चिक्कार घोर अति धावा बदनु पसारि।

गगन सिद्ध सुर त्रासित हा हा हेति पुकारि।।70।।

मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.7 · पुस्तक पृ. 838, 839

भावार्थ और शब्दार्थ

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1करि चिक्कार घोर अति धावा बदनु पसारि।

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2 गगन सिद्ध सुर त्रासित हा हा हेति पुकारि।।70।।

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स्रोत और प्रसंग

काण्ड
लङ्काकाण्ड
पद
दोहा/सोरठा 70
स्रोत अभिलेख
6.7
सहायक विषय
कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
मुद्रित पृष्ठ
838, 839

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