लङ्काकाण्ड · दोहा 69 · दोहा/सोरठा
महानाद करि गर्जा कोटि कोटि गहि कीस।
महानाद करि गर्जा कोटि कोटि गहि कीस।
महि पटकइ गजराज इव सपथ करइ दससीस।।69।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.69 · पुस्तक पृ. 838, 838
भावार्थ और शब्दार्थ
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1महानाद करि गर्जा कोटि कोटि गहि कीस।
वह प्रचंड नाद करके गरजा और करोड़ों-करोड़ वानरों को पकड़कर—
English explanation
He roared thunderously and, seizing countless millions of monkeys—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महानाद | प्रचंड ध्वनि | a tremendous sound |
| करि | करके | making |
| गर्जा | गरजा | roared |
| कोटि | करोड़ों | tens of millions |
| कोटि | करोड़ों | upon tens of millions |
| गहि | पकड़कर | having seized |
| कीस | वानरों को | monkeys |
2 महि पटकइ गजराज इव सपथ करइ दससीस।।69।।
—उन्हें विशाल हाथी की तरह धरती पर पटकता था और दस सिर वाले रावण की सौगंध खाता था।
English explanation
—he dashed them to the ground like a mighty elephant, swearing by ten-headed Ravana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महि | धरती पर | on the ground |
| पटकइ | पटकता है | dashes down |
| गजराज | विशाल हाथी | a mighty elephant |
| इव | की तरह | like |
| सपथ | सौगंध | an oath |
| करइ | खाता है | swears |
| दससीस | दस सिर वाले रावण की | by ten-headed Ravana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 69
- स्रोत अभिलेख
- 6.69
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 838, 838
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