लङ्काकाण्ड · दोहा 74 (क) · दोहा/सोरठा
खगपति सब धरि खाए माया नाग बरूथ।
खगपति सब धरि खाए माया नाग बरूथ।
माया बिगत भए सब हरषे बानर जूथ। 74(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.74 · पुस्तक पृ. 843, 844
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1खगपति सब धरि खाए माया नाग बरूथ।
पक्षिराज गरुड़ ने माया से बने सर्पों के सारे समूह पकड़कर खा लिए।
English explanation
Garuda, king of birds, caught and devoured all the hosts of serpents created by illusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खगपति | पक्षियों के राजा गरुड़ | Garuda, king of birds |
| सब | सभी | all |
| धरि | पकड़कर | having caught |
| खाए | खा लिए | devoured |
| माया | माया से बने | created by illusion |
| नाग | सर्प | serpents |
| बरूथ | समूह; दल | hosts; groups |
2 माया बिगत भए सब हरषे बानर जूथ। 74(क)।।
माया दूर हो जाने पर वानरों के सभी दल हर्षित हो गए।
English explanation
When the illusion vanished, all the bands of monkeys rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| माया | माया; मायावी प्रभाव | illusion; magical effect |
| बिगत | दूर; समाप्त | gone; dispelled |
| भए | हो जाने पर | having become |
| सब | सभी | all |
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| बानर | वानरों के | of the monkeys |
| जूथ | दल; समूह | bands; troops |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse-reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 74 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.74
- सहायक विषय
- मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
- मुद्रित पृष्ठ
- 843, 844
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।