लङ्काकाण्ड · दोहा 18 · दोहा/सोरठा
गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज।
गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज।
सिंह ठवनि इत उत चितव धीर बीर बल पुंज।।18।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.18 · पुस्तक पृ. 788, 789
भावार्थ और शब्दार्थ
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1गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज।
तब राम के कमल-जैसे चरणों का स्मरण करके अंगद राजसभा में गए।
English explanation
Then, remembering Rama’s lotus feet, Angada entered the royal assembly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गयउ | गए | went |
| सभा | सभा में | into the assembly |
| दरबार | राजदरबार | the royal court |
| तब | तब | then |
| सुमिरि | स्मरण करके | remembering |
| राम | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| पद | चरण | feet |
| कंज | कमल-जैसे | lotus-like |
2 सिंह ठवनि इत उत चितव धीर बीर बल पुंज।।18।।
धैर्यवान, वीर और बल के पुंज अंगद सिंह-जैसी मुद्रा में इधर-उधर देखते थे।
English explanation
Poised like a lion, Angada—steadfast, heroic, and a concentration of strength—looked this way and that.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिंह | सिंह जैसी | lion-like |
| ठवनि | मुद्रा या खड़े होने की भंगिमा | stance or bearing |
| इत | इधर | this way |
| उत | उधर | that way |
| चितव | देखते थे | looked |
| धीर | धैर्यवान | steadfast |
| बीर | वीर | heroic |
| बल | शक्ति का | of strength |
| पुंज | पुंज; सघन भंडार | a concentrated embodiment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 18
- स्रोत अभिलेख
- 6.18
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 788, 789
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