लङ्काकाण्ड · दोहा 19 · दोहा/सोरठा
जथा मत्त गज जूथ महुँ पंचानन चलि जाइ।
जथा मत्त गज जूथ महुँ पंचानन चलि जाइ।
राम प्रताप सुमिरि मन बैठ सभाँ सिरु नाइ।।19।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.19 · पुस्तक पृ. 789, 790
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जथा मत्त गज जूथ महुँ पंचानन चलि जाइ।
जैसे कोई सिंह मदमस्त हाथियों के झुंड में चला जाता है, वैसे ही अंगद सभा में गया।
English explanation
Angada entered the assembly as a lion strides into a herd of elephants in musth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जथा | जैसे | just as |
| मत्त | मदमस्त | in musth; intoxicated with pride |
| गज | हाथियों का | of elephants |
| जूथ | झुंड | herd |
| महुँ | में | amid |
| पंचानन | सिंह | lion |
| चलि | चलकर | striding |
| जाइ | जाता है | goes |
2 राम प्रताप सुमिरि मन बैठ सभाँ सिरु नाइ।।19।।
राम के प्रताप को मन में स्मरण करके और सिर झुकाकर अंगद सभा में बैठ गया।
English explanation
Remembering Rama’s might in his mind and bowing his head, Angada sat in the assembly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम का | Rama’s |
| प्रताप | प्रताप; पराक्रम | might; prowess |
| सुमिरि | स्मरण करके | remembering |
| मन | मन में | in his mind |
| बैठ | बैठ गया | sat down |
| सभाँ | सभा में | in the assembly |
| सिरु | सिर | head |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 19
- स्रोत अभिलेख
- 6.19
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 789, 790
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