लङ्काकाण्ड · दोहा 20 · दोहा/सोरठा
प्रनतपाल रघुबंसमनि त्राहि त्राहि अब मोहि।
प्रनतपाल रघुबंसमनि त्राहि त्राहि अब मोहि।
आरत गिरा सुनत प्रभु अभय करैगो तोहि।।20।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.2 · पुस्तक पृ. 790, 791
भावार्थ और शब्दार्थ
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1प्रनतपाल रघुबंसमनि त्राहि त्राहि अब मोहि।
कहो, “हे शरणागतों के रक्षक, हे रघुवंश के रत्न राम, अब मेरी रक्षा करो, रक्षा करो!”
English explanation
Say, “O protector of those who seek refuge, O Rama, jewel of Raghu’s lineage, save me now, save me!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रनतपाल | हे शरणागतों के रक्षक | O protector of those seeking refuge |
| रघुबंसमनि | हे रघुवंश के रत्न राम | O Rama, jewel of Raghu’s lineage |
| त्राहि | रक्षा करो | save |
| त्राहि | रक्षा करो | save |
| अब | अब | now |
| मोहि | मुझे | me |
2 आरत गिरा सुनत प्रभु अभय करैगो तोहि।।20।।
तुम्हारी व्याकुल विनती सुनते ही प्रभु तुम्हें निर्भय कर देंगे।
English explanation
On hearing your distressed plea, the Lord will grant you freedom from fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आरत | व्याकुल | distressed |
| गिरा | वाणी या विनती | words or plea |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम | Lord Rama |
| अभय | निर्भय | free from fear |
| करैगो | कर देंगे | will make |
| तोहि | तुम्हें | you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 20
- स्रोत अभिलेख
- 6.2
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 790, 791
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