लङ्काकाण्ड · दोहा 27 · दोहा/सोरठा
कुंभकरन अस बंधु मम सुत प्रसिद्ध सक्रारि।
मूल पाठ
कुंभकरन अस बंधु मम सुत प्रसिद्ध सक्रारि।
मोर पराक्रम नहिं सुनेहि जितेउँ चराचर झारि।।27।।
स्रोत अभिलेख 6.27 · पुस्तक पृ. 797, 798
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[वह बोला—अरे मूर्ख!] कुम्भकर्ण-ऐसा मेरा भाई है, इन्द्रका शत्रु सुप्रसिद्ध मेघनाद मेरा पुत्र है! और मेरा पराक्रम तो तूने सुना ही नहीं कि मैंने सम्पूर्ण जड-चेतन जगत्को जीत लिया है!॥ २७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 798 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1कुंभकरन अस बंधु मम सुत प्रसिद्ध सक्रारि।
English explanation
I have a brother like Kumbhakarna, and my son is the renowned conqueror of Indra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुंभकरन | रावण का भाई कुंभकर्ण | Kumbhakarna, Ravana’s brother |
| अस | जैसा | like |
| बंधु | भाई | brother |
| मम | मेरा | my |
| सुत | पुत्र | son |
| प्रसिद्ध | विख्यात | renowned |
| सक्रारि | इंद्र का शत्रु, मेघनाद अर्थात् इंद्रजित | Indra’s foe, Megh nada, known as Indrajit |
2 मोर पराक्रम नहिं सुनेहि जितेउँ चराचर झारि।।27।।
English explanation
Have you not heard of my prowess? I have conquered the entire world of moving and unmoving beings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मेरा | my |
| पराक्रम | वीरता; बल | prowess |
| नहिं | नहीं | not |
| सुनेहि | तूने सुना | you have heard |
| जितेउँ | मैंने जीत लिया | I have conquered |
| चराचर | चल और अचल समस्त जगत | the moving and unmoving world |
| झारि | पूरा; सबका सब | entirely; all of it |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 27
- स्रोत अभिलेख
- 6.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 798
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 797, 798
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।