लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सठ साखामृग जोरि सहाई। बाँधा सिंधु इहइ प्रभुताई।।
मूल पाठ
सठ साखामृग जोरि सहाई। बाँधा सिंधु इहइ प्रभुताई।।
नाघहिं खग अनेक बारीसा। सूर न होहिं ते सुनु सब कीसा।।
स्रोत अभिलेख 6.28 · पुस्तक पृ. 798, 799
भावार्थ
मूल पाठ के बादरे दुष्ट! वानरोंकी सहायता जोड़कर रामने समुद्र बाँध लिया; बस, यही उसकी प्रभुता है। समुद्रको तो अनेकों पक्षी भी लाँघ जाते हैं। पर इसीसे वे सभी शूरवीर नहीं हो जाते। अरे मूर्ख बंदर! सुन—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 798 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सठ साखामृग जोरि सहाई। बाँधा सिंधु इहइ प्रभुताई।।
English explanation
AI draft: Fool! Gathering monkeys as helpers and bridging the ocean—is that all his greatness?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सठ | हे मूर्ख | O fool |
| साखामृग | वानरों को | monkeys |
| जोरि | जोड़कर; इकट्ठा करके | gathering together |
| सहाई | सहायक के रूप में | as helpers |
| बाँधा | बाँध दिया; सेतु बना दिया | bridged |
| सिंधु | समुद्र | the ocean |
| इहइ | यही | this alone |
| प्रभुताई | प्रभुता; बड़प्पन | lordly greatness |
2 नाघहिं खग अनेक बारीसा। सूर न होहिं ते सुनु सब कीसा।।
English explanation
Many birds cross the ocean; that does not make them all heroes—listen, monkey!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाघहिं | पार कर जाते हैं | cross over |
| खग | पक्षी | birds |
| अनेक | बहुत-से | many |
| बारीसा | समुद्र | the ocean |
| सूर | वीर | heroes |
| न | नहीं | not |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| ते | वे | they |
| सुनु | सुनो | listen |
| सब | सब | all |
| कीसा | हे वानर | O monkey |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 798
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 798, 799
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