लङ्काकाण्ड · दोहा 48 (ख) · दोहा/सोरठा
कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध।
मूल पाठ
कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध।
सिव बिरंचि जेहि सेवहिं तासों कवन बिरोध।।48(ख)।।
स्रोत अभिलेख 6.48 · पुस्तक पृ. 818, 819
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो कालस्वरूप हैं, दुष्टोंके समूहरूपी वनके भस्म करनेवाले [अग्रि] हैं, गुणोंके धाम और ज्ञानघन हैं, एवं शिवजी और ब्रह्माजी भी जिनकी सेवा करते हैं, उनसे वैर कैसा?॥ ४८ (ख)॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 819 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध।
English explanation
He is time and death embodied, the burner of the forest of the wicked, the abode of virtues, and concentrated knowledge itself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कालरूप | काल अर्थात् मृत्यु के स्वरूप | the embodiment of time and death |
| खल | दुष्टों का | of the wicked |
| बन | वन | forest |
| दहन | जलाने वाले | the burner |
| गुनागार | गुणों के भंडार | abode of virtues |
| घनबोध | सघन ज्ञानस्वरूप | concentrated knowledge embodied |
2 सिव बिरंचि जेहि सेवहिं तासों कवन बिरोध।।48(ख)।।
English explanation
What opposition can there be to the one whom Shiva and Brahma serve?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिव | भगवान शिव | Shiva |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| जेहि | जिनकी | whom |
| सेवहिं | सेवा करते हैं | serve |
| तासों | उनसे | against him |
| कवन | कैसा | what kind of |
| बिरोध | विरोध | opposition |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse-reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 48 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.48
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 819
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 818, 819
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