लङ्काकाण्ड · दोहा 48 (क) · दोहा/सोरठा
हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान।
हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान।
जेहि मारे सोइ अवतरेउ कृपासिंधु भगवान।।48(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.48 · पुस्तक पृ. 818, 819
भावार्थ और शब्दार्थ
1हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान।
हिरन्याच्छ अपने भाई सहित, और बलवान मधु तथा कैटभ—इन सबको जिसने मारा, उसका कथन अगली पंक्ति में पूरा होता है।
English explanation
Hiranyachchha together with his brother, and the mighty Madhu and Kaitabha—the statement about their slayer continues in the next line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हिरन्याच्छ | हिरण्याक्ष नामक दैत्य | the demon Hiranyaksha |
| भ्राता | भाई, हिरण्यकशिपु | his brother, Hiranyakashipu |
| सहित | के साथ | together with |
| मधु | मधु नामक दैत्य | the demon Madhu |
| कैटभ | कैटभ नामक दैत्य | the demon Kaitabha |
| बलवान | बलशाली | mighty |
2 जेहि मारे सोइ अवतरेउ कृपासिंधु भगवान।।48(क)।।
जिन्होंने उन दैत्यों को मारा था, वही कृपा के सागर भगवान राम के रूप में अवतरित हुए हैं।
English explanation
The same Lord who slew those demons, the ocean of compassion, has descended as Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिन्होंने | who |
| मारे | मारा | slew |
| सोइ | वही | that very same one |
| अवतरेउ | अवतार लेकर आए हैं | has incarnated |
| कृपासिंधु | कृपा के सागर | ocean of compassion |
| भगवान | भगवान | the Lord |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse-reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 48 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.48
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 818, 819
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