लङ्काकाण्ड · दोहा 47 · दोहा/सोरठा
कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ।
कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ।
गर्जहिं भालु बलीमुख रिपु दल बल बिचलाइ।।47।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.47 · पुस्तक पृ. 817, 818
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ।
कुछ राक्षस मारे गए, कुछ घायल हुए और कुछ भागकर किले पर चढ़ गए।
English explanation
Some demons were killed, some wounded, and some fled and climbed into the fortress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कछु | कुछ राक्षस | some demons |
| मारे | मारे गए | were killed |
| कछु | कुछ | some |
| घायल | घायल हुए | were wounded |
| कछु | कुछ | some |
| गढ़ | किले पर | onto the fortress |
| चढ़े | चढ़ गए | climbed |
| पराइ | भागकर | having fled |
2 गर्जहिं भालु बलीमुख रिपु दल बल बिचलाइ।।47।।
शत्रु की सेना और उसके बल को विचलित करके भालू और वानर गरजते हैं।
English explanation
The bears and monkeys roar, having thrown the enemy army and its strength into disarray.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गर्जहिं | गरजते हैं | roar |
| भालु | भालू योद्धा | bear warriors |
| बलीमुख | वानर योद्धा | monkey warriors |
| रिपु | शत्रु की | of the enemy |
| दल | सेना | army |
| बल | शक्ति; सैन्यबल | strength; military might |
| बिचलाइ | विचलित करके | having thrown into disarray |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 47
- स्रोत अभिलेख
- 6.47
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 817, 818
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