लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
हा राम हा रघुनाथ। कहि सुभट मीजहिं हाथ।।
मूल पाठ
हा राम हा रघुनाथ। कहि सुभट मीजहिं हाथ।।
एहि बिधि सकल बल तोरि। तेहिं कीन्ह कपट बहोरि।।6।।
स्रोत अभिलेख 6.101 · पुस्तक पृ. 876, 878
भावार्थ
मूल पाठ के बादहा राम! हा रघुनाथ! पुकारते हुए श्रेष्ठ योद्धा अपने हाथ मलते (पछताते) हैं। इस प्रकार सबका बल तोड़कर रावणने फिर दूसरी माया रची॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 877 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हा राम हा रघुनाथ। कहि सुभट मीजहिं हाथ।।
English explanation
Crying ‘Alas, Rama! Alas, Lord of Raghu’s line!’ the warriors wrung their hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हा | हाय! | alas! |
| राम | हे राम | O Rama |
| हा | हाय! | alas! |
| रघुनाथ | हे रघुकुल के स्वामी राम | O Rama, lord of Raghu’s line |
| कहि | कहकर | saying |
| सुभट | वीर योद्धा | valiant warriors |
| मीजहिं | मलते हैं | wring |
| हाथ | हाथ | their hands |
2 एहि बिधि सकल बल तोरि। तेहिं कीन्ह कपट बहोरि।।6।।
English explanation
Having thus broken the strength of the entire army, Ravana devised another deception.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| सकल | समस्त | entire |
| बल | सेना का बल | the army’s strength |
| तोरि | तोड़कर | having broken |
| तेहिं | उसने, रावण ने | he, Ravana |
| कीन्ह | किया | performed |
| कपट | छलपूर्ण माया | deception |
| बहोरि | फिर | again |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 877
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 876, 878
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