लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
प्रगटेसि बिपुल हनुमान। धाए गहे पाषान।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउसने बहुत-से हनुमान् प्रकट किये, जो पत्थर लिये दौड़े। उन्होंने चारों ओर दल बनाकर श्रीरामचन्द्रजीको जा घेरा॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 877 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रगटेसि बिपुल हनुमान। धाए गहे पाषान।।
तिन्ह रामु घेरे जाइ। चहुँ दिसि बरूथ बनाइ।।7।।
स्रोत अभिलेख 6.101 · पुस्तक पृ. 876, 878
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रगटेसि बिपुल हनुमान। धाए गहे पाषान।।
English explanation
He conjured many illusory Hanumans, who rushed forward holding stones.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रगटेसि | उसने प्रकट किए | he caused to appear |
| बिपुल | बहुत-से | many |
| हनुमान | हनुमान के मायावी रूप | illusory forms of Hanuman |
| धाए | दौड़े | rushed |
| गहे | पकड़े हुए | holding |
| पाषान | पत्थर | stones |
2 तिन्ह रामु घेरे जाइ। चहुँ दिसि बरूथ बनाइ।।7।।
English explanation
They went and surrounded Rama, forming ranks on all four sides.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| रामु | राम को | Rama |
| घेरे | घेर लिया | surrounded |
| जाइ | जाकर | having gone |
| चहुँ | चारों | all four |
| दिसि | दिशाओं में | directions |
| बरूथ | दल, सैन्य घेरा | ranks, encircling troops |
| बनाइ | बनाकर | forming |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 877
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 876, 878
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।