लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
मारहु धरहु जनि जाइ। कटकटहिं पूँछ उठाइ।।
मूल पाठ
मारहु धरहु जनि जाइ। कटकटहिं पूँछ उठाइ।।
दहँ दिसि लँगूर बिराज। तेहिं मध्य कोसलराज।।8।।
स्रोत अभिलेख 6.101 · पुस्तक पृ. 876, 878
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे पूँछ उठाकर कटकटाते हुए पुकारने लगे, 'मारो, पकड़ो, जाने न पावे। उनके लंगूर (पूँछ) दसों दिशाओंमें शोभा दे रहे हैं और उनके बीचमें कोसलराज श्रीरामजी हैं॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 877 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मारहु धरहु जनि जाइ। कटकटहिं पूँछ उठाइ।।
English explanation
Crying ‘Kill! Seize! Do not let him escape!’ they raised their tails and gnashed their teeth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मारहु | मारो | kill! |
| धरहु | पकड़ो | seize! |
| जनि | न, मत | not; do not |
| जाइ | जाने पाए | let him escape |
| कटकटहिं | दाँत कटकटाते हैं | gnash their teeth |
| पूँछ | पूँछ | tails |
| उठाइ | उठाकर | raising |
2 दहँ दिसि लँगूर बिराज। तेहिं मध्य कोसलराज।।8।।
English explanation
Monkeys stood in all ten directions, with Rama, king of Kosala, in their midst.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दहँ | दसों | all ten |
| दिसि | दिशाओं में | directions |
| लँगूर | लंगूर, मायावी वानर | monkeys, illusory forms |
| बिराज | स्थित हैं | stand arrayed |
| तेहिं | उनके | their |
| मध्य | बीच | midst |
| कोसलराज | कोसल के राजा राम | Rama, king of Kosala |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 877
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 876, 878
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।