लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
सो ब्रह्म दत्त प्रचंड सक्ति अनंत उर लागी सही।
मूल पाठ
सो ब्रह्म दत्त प्रचंड सक्ति अनंत उर लागी सही।
पर्यो बीर बिकल उठाव दसमुख अतुल बल महिमा रही॥
ब्रह्मांड भवन बिराज जाकें एक सिर जिमि रज कनी।
तेहि चह उठावन मूढ़ रावन जान नहिं त्रिभुअन धनी॥
स्रोत अभिलेख 6.83 · पुस्तक पृ. 854, 855
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह ब्रह्माकी दी हुई प्रचण्ड शक्ति लक्ष्मणजीकी ठीक छातीमें लगी। वीर लक्ष्मणजी व्याकुल होकर गिर पड़े। तब रावण उन्हें उठाने लगा, पर उसके अतुलित बलकी महिमा यों ही रह गयी (व्यर्थ हो गयी, वह उन्हें उठा न सका)। जिनके एक ही सिरपर ब्रह्माण्डरूपी भवन धूलके एक कणके समान विराजता है, उन्हें मूर्ख रावण उठाना चाहता है! वह तीनों भुवनोंके स्वामी लक्ष्मणजीको नहीं जानता।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 855 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1सो ब्रह्म दत्त प्रचंड सक्ति अनंत उर लागी सही।
English explanation
That fierce spear bestowed by Brahma struck Lakshmana, the embodiment of Ananta, squarely in the chest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| ब्रह्म | ब्रह्मा द्वारा | by Brahma, the creator |
| दत्त | दी हुई | bestowed |
| प्रचंड | अत्यंत प्रबल | fierce and powerful |
| सक्ति | शक्ति नामक भाला-अस्त्र | a spear-like weapon |
| अनंत | अनंत शेष के स्वरूप लक्ष्मण | Lakshmana as Ananta, the cosmic serpent |
| उर | वक्ष पर | in the chest |
| लागी | लगी | struck |
| सही | ठीक लक्ष्य पर | squarely |
2पर्यो बीर बिकल उठाव दसमुख अतुल बल महिमा रही॥
English explanation
The warrior Lakshmana fell overcome. Ravana tried to lift him, but the vaunted glory of his unmatched strength came to nothing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर्यो | गिर पड़े | fell |
| बीर | वीर लक्ष्मण | the warrior Lakshmana |
| बिकल | व्याकुल और असहाय | overcome and helpless |
| उठाव | उठाने का प्रयत्न करता है | tries to lift him |
| दसमुख | दस मुख वाला रावण | Ravana, the ten-headed one |
| अतुल | अतुलनीय | unmatched |
| बल | बल की | of strength |
| महिमा | महिमा; गौरव | glory; renown |
| रही | धरी रह गई; काम न आई | came to nothing |
3ब्रह्मांड भवन बिराज जाकें एक सिर जिमि रज कनी।
English explanation
Upon a single head of whom the edifice of the universe rests like a speck of dust.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्मांड | ब्रह्मांडरूपी | of the universe |
| भवन | भवन; विशाल संरचना | edifice |
| बिराज | स्थित है | rests |
| जाकें | जिसके | whose |
| एक | एक ही | a single |
| सिर | सिर पर | upon a head |
| जिमि | जैसे | like |
| रज | धूल का | of dust |
| कनी | छोटा कण | tiny speck |
4तेहि चह उठावन मूढ़ रावन जान नहिं त्रिभुअन धनी॥
English explanation
Foolish Ravana wishes to lift that very one, not recognizing him as the lord of the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उन्हीं को | that very one |
| चह | चाहता है | wishes |
| उठावन | उठाना | to lift |
| मूढ़ | मूर्ख | foolish |
| रावन | लंका का राजा रावण | Ravana, king of Lanka |
| जान | पहचानता है | recognizes |
| नहिं | नहीं | not |
| त्रिभुअन | तीनों लोकों का | of the three worlds |
| धनी | स्वामी | lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.83
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 855
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 854, 855
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।