लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
सारंग कर सुंदर निषंग सिलीमुखाकर कटि कस्यो।
मूल पाठ
सारंग कर सुंदर निषंग सिलीमुखाकर कटि कस्यो।
भुजदंड पीन मनोहरायत उर धरासुर पद लस्यो॥
कह दास तुलसी जबहिं प्रभु सर चाप कर फेरन लगे।
ब्रह्मांड दिग्गज कमठ अहि महि सिं धु भूधर डगमगे॥
स्रोत अभिलेख 6.86 · पुस्तक पृ. 857, 858
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुने हाथमें शाङ्र्गधनुष लेकर कमरमें बाणोंकी खान (अक्षय) सुन्दर तरकस कस लिया। उनके भुजदण्ड पुष्ट हैं और मनोहर चौड़ी छातीपर ब्राह्मण (भृगुजी) के चरणका चिह्न शोभित है। तुलसीदासजी कहते हैंं, ज्यों ही प्रभु धनुष-बाण हाथमें लेकर फिराने लगे, त्यों ही ब्रह्माण्ड, दिशाओंके हाथी, कच्छप, शेषजी, पृथ्वी, समुद्र और पर्वत सभी डगमगा उठे।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 858 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1सारंग कर सुंदर निषंग सिलीमुखाकर कटि कस्यो।
English explanation
The Saranga bow is in his hand, and a beautiful quiver holding arrows is fastened at his waist.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सारंग | श्रीराम का सारंग धनुष | Rama’s Saranga bow |
| कर | हाथ में | in his hand |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| निषंग | तरकश | quiver |
| सिलीमुखाकर | बाणों का भंडार | a store of arrows |
| कटि | कमर में | at his waist |
| कस्यो | कसा हुआ है | is fastened securely |
2भुजदंड पीन मनोहरायत उर धरासुर पद लस्यो॥
English explanation
His arms are powerful, beautiful, and long; the mark of sage Bhrigu’s foot shines upon his chest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भुजदंड | दंड के समान भुजाएँ | staff-like arms |
| पीन | पुष्ट और बलिष्ठ | full and powerful |
| मनोहरायत | मनोहर और लंबी | beautiful and long |
| उर | वक्ष पर | upon his chest |
| धरासुर | ब्राह्मण ऋषि भृगु का | of the Brahmin sage Bhrigu |
| पद | चरण का चिह्न | footprint |
| लस्यो | शोभित हुआ | shone resplendently |
3कह दास तुलसी जबहिं प्रभु सर चाप कर फेरन लगे।
English explanation
Tulsidas, the servant, says: As soon as Lord Rama began wielding the arrow and bow in his hands—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहते हैं | says |
| दास | सेवक | servant |
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| जबहिं | ज्यों ही | as soon as |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सर | बाण | arrow |
| चाप | धनुष | bow |
| कर | हाथ में | in his hands |
| फेरन | घुमाने या संचालित करने | to wield or move about |
| लगे | लगे; आरंभ किया | began |
4ब्रह्मांड दिग्गज कमठ अहि महि सिं धु भूधर डगमगे॥
English explanation
The cosmos, the elephants of the directions, the cosmic tortoise, Shesha the serpent, the earth, the ocean, and the mountains began to shake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्मांड | समस्त विश्व | the cosmos |
| दिग्गज | दिशाओं को धारण करने वाले हाथी | the elephants supporting the directions |
| कमठ | पृथ्वीधारक कच्छप | the cosmic supporting tortoise |
| अहि | शेषनाग | Shesha, the cosmic serpent |
| महि | पृथ्वी | the earth |
| सिं | समुद्र—‘सिंधु’ का पहला अंश। | Ocean—the first fragment of ‘सिंधु’. |
| धु | समुद्र (‘सिंधु’ का खंड)। | Ocean (part of the split word ‘सिंधु’). |
| भूधर | पर्वत | mountains |
| डगमगे | डगमगा उठे | began to shake |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.86
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 858
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 857, 858
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।