लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
श्रीखंड सम पावक प्रबेस कियो सुमिरि प्रभु मैथिली।
मूल पाठ
श्रीखंड सम पावक प्रबेस कियो सुमिरि प्रभु मैथिली।
जय कोसलेस महेस बंदित चरन रति अति निर्मली॥
प्रतिबिंब अरु लौकिक कलंक प्रचंड पावक महुँ जरे।
प्रभु चरित काहुँ न लखे नभ सुर सिद्ध मुनि देखहिं खरे॥
स्रोत अभिलेख 6.109 · पुस्तक पृ. 887, 887
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभु श्रीरामजीका स्मरण करके और जिनके चरण महादेवजीके द्वारा वन्दित हैं तथा जिनमें सीताजीकी अत्यन्त विशुद्ध प्रीति है, उन कोसलपतिकी जय बोलकर जानकीजीने चन्दनके समान शीतल हुई अग्रिमें प्रवेश किया। प्रतिबिम्ब (सीताजीकी छायामूर्ति) और उनका लौकिक कलंक प्रचण्ड अग्रिमें जल गये। प्रभुके इन चरित्रोंको किसीने नहीं जाना। देवता, सिद्ध और मुनि सब आकाशमें खड़े देखते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 887 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1श्रीखंड सम पावक प्रबेस कियो सुमिरि प्रभु मैथिली।
English explanation
Remembering the Lord, Sita, the princess of Mithila, entered the fire as though it were sandalwood.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीखंड | चंदन | sandalwood |
| सम | के समान | like |
| पावक | अग्नि में | into the fire |
| प्रबेस | प्रवेश | entry |
| कियो | किया | made |
| सुमिरि | स्मरण करके | having remembered |
| प्रभु | प्रभु राम का | the Lord Rama |
| मैथिली | मिथिला की राजकुमारी सीता ने | Sita, princess of Mithila |
2जय कोसलेस महेस बंदित चरन रति अति निर्मली॥
English explanation
Glory to Rama, Lord of Kosala, whose feet Shiva reveres and for whom Sita's love is utterly pure.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जय | जय हो | glory to |
| कोसलेस | कौशल के स्वामी राम | Rama, Lord of Kosala |
| महेस | महेश अर्थात शिव द्वारा | by Shiva |
| बंदित | वंदित | revered |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| रति | प्रेम | love |
| अति | अत्यंत | utterly |
| निर्मली | निर्मल | pure |
3प्रतिबिंब अरु लौकिक कलंक प्रचंड पावक महुँ जरे।
English explanation
Sita's counterpart and the worldly stigma burned away in the fierce fire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रतिबिंब | सीता का प्रतिरूप | Sita's counterpart |
| अरु | और | and |
| लौकिक | लोक में लगा | worldly |
| कलंक | कलंक | stigma |
| प्रचंड | अत्यंत तीव्र | fierce |
| पावक | अग्नि | fire |
| महुँ | में | in |
| जरे | जल गए | burned away |
4प्रभु चरित काहुँ न लखे नभ सुर सिद्ध मुनि देखहिं खरे॥
English explanation
No one understood the Lord's deed; gods, perfected beings, and sages stood watching in the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम का | the Lord Rama's |
| चरित | चरित का रहस्य | the meaning of the deed |
| काहुँ | किसी ने | anyone |
| न | नहीं | not |
| लखे | समझा | understood |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| सुर | देवता | gods |
| सिद्ध | सिद्ध पुरुष | perfected beings |
| मुनि | मुनि | sages |
| देखहिं | देखते हैं | watch |
| खरे | खड़े हुए | standing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 887
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 887, 887
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।