लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं मन बच क्रम मम उर माहीं। तजि रघुबीर आन गति नाहीं।।
मूल पाठ
जौं मन बच क्रम मम उर माहीं। तजि रघुबीर आन गति नाहीं।।
तौ कृसानु सब कै गति जाना। मो कहुँ होउ श्रीखंड समाना।।
स्रोत अभिलेख 6.109 · पुस्तक पृ. 887, 887
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[सीताजीने लीलासे कहा—] यदि मन, वचन और कर्मसे मेरे हृदयमें श्रीरघुवीरको छोड़कर दूसरी गति (अन्य किसीका आश्रय) नहीं है, तो अग्रिदेव जो सबके मनकी गति जानते हैं, [मेरे भी मनकी गति जानकर] मेरे लिये चन्दनके समान शीतल हो जायँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 887 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जौं मन बच क्रम मम उर माहीं। तजि रघुबीर आन गति नाहीं।।
English explanation
If, in thought, word, and deed, my heart has no refuge other than Rama, the hero of Raghu’s line—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| मन | मन से | in thought |
| बच | वचन से | in word |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| मम | मेरे | my |
| उर | हृदय | heart |
| माहीं | में | within |
| तजि | छोड़कर; के अतिरिक्त | apart from |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s line |
| आन | दूसरा | other |
| गति | आश्रय | refuge |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
2 तौ कृसानु सब कै गति जाना। मो कहुँ होउ श्रीखंड समाना।।
English explanation
Then, O Fire, who knows the condition of all, become like sandalwood for me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौ | तो | then |
| कृसानु | हे अग्नि | O Fire |
| सब | सबकी | everyone |
| कै | की | of |
| गति | दशा; वास्तविक स्थिति | condition; true state |
| जाना | जानने वाले | knower of |
| मो | मेरे | me |
| कहुँ | लिए | for |
| होउ | हो जाओ | become |
| श्रीखंड | चंदन | sandalwood |
| समाना | के समान | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 887
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 887, 887
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