लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि राम रुख लछिमन धाए। पावक प्रगटि काठ बहु लाए।।
मूल पाठ
देखि राम रुख लछिमन धाए। पावक प्रगटि काठ बहु लाए।।
पावक प्रबल देखि बैदेही। हृदयँ हरष नहिं भय कछु तेही।।
स्रोत अभिलेख 6.109 · पुस्तक पृ. 887, 887
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर श्रीरामजीका रुख देखकर लक्ष्मणजी दौड़े और आग तैयार करके बहुत-सी लकड़ी ले आये। अग्रिको खूब बढ़ी हुई देखकर जानकीजीके हृदयमें हर्ष हुआ। उन्हें भय कुछ भी नहीं हुआ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 887 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखि राम रुख लछिमन धाए। पावक प्रगटि काठ बहु लाए।।
English explanation
Seeing Rama’s disposition, Lakshmana hurried off; he brought much wood and kindled a fire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| राम | राम का | Rama’s |
| रुख | रुख; अभिप्राय | disposition; intent |
| लछिमन | लक्ष्मण | Lakshmana |
| धाए | दौड़े | hurried off |
| पावक | अग्नि | fire |
| प्रगटि | प्रकट की; प्रज्वलित की | kindled |
| काठ | लकड़ी | wood |
| बहु | बहुत-सी | much |
| लाए | ले आए | brought |
2 पावक प्रबल देखि बैदेही। हृदयँ हरष नहिं भय कछु तेही।।
English explanation
Seeing the blazing fire, Sita felt joy in her heart; she had no fear at all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पावक | अग्नि | fire |
| प्रबल | प्रचंड | blazing fiercely |
| देखि | देखकर | seeing |
| बैदेही | वैदेही सीता, विदेहराज की पुत्री | Sita, daughter of the king of Videha |
| हृदयँ | हृदय में | in her heart |
| हरष | हर्ष | joy |
| नहिं | नहीं | no |
| भय | भय | fear |
| कछु | कुछ भी | any at all |
| तेही | उन्हें, अर्थात सीता को | to her, namely Sita |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 887
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 887, 887
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