लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
लियो हृदयँ लाइ कृपा निधान सुजान रायँ रमापती।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसुजानोंके राजा (शिरोमणि), लक्ष्मीकान्त, कृपानिधान भगवान्ने उसको हृदयसे लगा लिया और अत्यन्त निकट बैठाकर कुशल पूछी। वह विनती करने लगा—आपके जो चरणकमल ब्रह्माजी और शङ्करजीसे सेवित हैं, उनके दर्शन करके मैं अब सकुशल हूँ। हे सुखधाम! हे पूर्णकाम श्रीरामजी! मैं आपको नमस्कार करता हूँ, नमस्कार करता हूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 902 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लियो हृदयँ लाइ कृपा निधान सुजान रायँ रमापती।
बैठारि परम समीप बूझी कुसल सो कर बीनती॥
अब कुसल पद पंकज बिलोकि बिरंचि संकर सेब्य जे।
सुख धाम पूरनकाम राम नमामि राम नमामि ते॥
स्रोत अभिलेख 6.121 · पुस्तक पृ. 901, 902
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1लियो हृदयँ लाइ कृपा निधान सुजान रायँ रमापती।
English explanation
AI draft: Rama, the treasury of compassion, wise king and consort of Lakshmi, embraced the Nishada chief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लियो | ले लिया | took |
| हृदयँ | हृदय से | to his heart |
| लाइ | लगाकर | drawing close |
| कृपा | करुणा | compassion |
| निधान | भंडार | treasury |
| सुजान | विवेकशील, सब जानने वाले | wise and discerning |
| रायँ | राजा ने | the king |
| रमापती | लक्ष्मी के पति राम | Rama, consort of Lakshmi |
2बैठारि परम समीप बूझी कुसल सो कर बीनती॥
English explanation
Seating him very close, Rama asked after his welfare; the Nishada chief then offered his humble words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठारि | बैठाकर | having seated him |
| परम | अत्यंत | very |
| समीप | निकट | close |
| बूझी | पूछी | asked about |
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| सो | वह निषाद | he, the Nishada chief |
| कर | करता है | makes |
| बीनती | विनती | a humble submission |
3अब कुसल पद पंकज बिलोकि बिरंचि संकर सेब्य जे।
English explanation
Now I am well, having beheld your lotus feet, which Brahma and Shiva revere.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| कुसल | मैं कुशल हूँ | I am well |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल | lotuses |
| बिलोकि | देखकर | having beheld |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| संकर | शिव | Shiva |
| सेब्य | सेवा और पूजन के योग्य | worthy of reverent service |
| जे | जो चरण | which feet |
4सुख धाम पूरनकाम राम नमामि राम नमामि ते॥
English explanation
O Rama, abode of happiness, whose desires are fulfilled! I bow to you; Rama, I bow to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुख | सुख | happiness |
| धाम | धाम, आश्रय | abode |
| पूरनकाम | जिनकी सभी कामनाएँ पूर्ण हैं | whose desires are all fulfilled |
| राम | हे राम | O Rama |
| नमामि | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow |
| राम | हे राम | O Rama |
| नमामि | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow |
| ते | आपको | to you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 902
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान · श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 901, 902
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।