लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही। परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही।।
मूल पाठ
प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही। परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही।।
प्रीति परम बिलोकि रघुराई। हरषि उठाइ लियो उर लाई।।
स्रोत अभिलेख 6.121 · पुस्तक पृ. 901, 902
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर श्रीजानकीजीसहित प्रभुको देखकर वह [आनन्द-समाधिमें मग्र होकर] पृथ्वीपर गिर पड़ा, उसे शरीरकी सुधि न रही। श्रीरघुनाथजीने उसका परम प्रेम देखकर उसे उठाकर हर्षके साथ हृदयसे लगा लिया॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 902 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही। परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही।।
English explanation
Seeing Lord Rama together with Sita, Guha fell to the ground, losing awareness of his body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभुहि | प्रभु राम को | Lord Rama |
| सहित | साथ में | together with |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| बैदेही | सीता, विदेहराज की पुत्री | Sita, daughter of the king of Videha |
| परेउ | गिर पड़े | fell |
| अवनि | भूमि पर | to the ground |
| तन | शरीर की | of his body |
| सुधि | सुध; चेतना | awareness |
| नहिं | नहीं रही | was lost |
| तेही | उन्हें, गुह को | to him, Guha |
2 प्रीति परम बिलोकि रघुराई। हरषि उठाइ लियो उर लाई।।
English explanation
Seeing Guha’s profound love, Rama, lord of the Raghu lineage, joyfully lifted him and embraced him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रीति | प्रेम | love |
| परम | अत्यंत | profound |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम ने | Rama, lord of the Raghu lineage |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| उठाइ | उठाकर | lifting him |
| लियो | ले लिया | took him |
| उर | हृदय से | to his breast |
| लाई | लगाकर | holding close |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 902
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान · श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 901, 902
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