लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दीन्हि असीस हरषि मन गंगा। सुंदरि तव अहिवात अभंगा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दगङ्गाजीने मनमें हर्षित होकर आशीर्वाद दिया—हे सुन्दरी! तुम्हारा सुहाग अखण्ड हो। भगवान्के तटपर उतरनेकी बात सुनते ही निषादराज गुह प्रेममें विह्वल होकर दौड़ा। परम सुखसे परिपूर्ण होकर वह प्रभुके समीप आया,॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 902 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दीन्हि असीस हरषि मन गंगा। सुंदरि तव अहिवात अभंगा।।
सुनत गुहा धायउ प्रेमाकुल। आयउ निकट परम सुख संकुल।।
स्रोत अभिलेख 6.121 · पुस्तक पृ. 901, 902
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 दीन्हि असीस हरषि मन गंगा। सुंदरि तव अहिवात अभंगा।।
English explanation
With joy in her heart, the Ganges blessed her: “Beautiful one, may your married felicity remain unbroken.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीन्हि | दिया | gave |
| असीस | आशीर्वाद | a blessing |
| हरषि | प्रसन्न होकर | rejoicing |
| मन | मन में | in her heart |
| गंगा | गंगा ने | the Ganges |
| सुंदरि | हे सुंदरी | O beautiful one |
| तव | तुम्हारा | your |
| अहिवात | सौभाग्य; पति का जीवित रहना | married felicity with a living husband |
| अभंगा | अखंड रहे | may remain unbroken |
2 सुनत गुहा धायउ प्रेमाकुल। आयउ निकट परम सुख संकुल।।
English explanation
On hearing the news, Guha ran, overwhelmed with love, and came near, filled with supreme joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| गुहा | निषादराज गुह | Guha, the Nishada chief |
| धायउ | दौड़े | ran |
| प्रेमाकुल | प्रेम से व्याकुल | overwhelmed with love |
| आयउ | आए | came |
| निकट | पास | near |
| परम | अत्यंत | supreme |
| सुख | सुख से | with joy |
| संकुल | भरे हुए | filled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 902
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान · श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 901, 902
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।