लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुरसरि नाघि जान तब आयो। उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइतनेमें ही विमान गङ्गाजीको लाँघकर [इस पार] आ गया और प्रभुकी आज्ञा पाकर वह किनारेपर उतरा। तब सीताजी बहुत प्रकारसे गङ्गाजीकी पूजा करके फिर उनके चरणोंपर गिरीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 902 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुरसरि नाघि जान तब आयो। उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो।।
तब सीताँ पूजी सुरसरी। बहु प्रकार पुनि चरनन्हि परी।।
स्रोत अभिलेख 6.121 · पुस्तक पृ. 901, 902
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुरसरि नाघि जान तब आयो। उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो।।
English explanation
Then the aerial vehicle crossed the Ganges and, receiving the Lord’s command, landed on the bank.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरसरि | गंगा नदी को | the Ganges |
| नाघि | पार करके | having crossed |
| जान | विमान | the aerial vehicle |
| तब | तब | then |
| आयो | आया | came |
| उतरेउ | उतरा | landed |
| तट | तट पर | on the bank |
| प्रभु | प्रभु की | the Lord’s |
| आयसु | आज्ञा | command |
| पायो | पाकर | having received |
2 तब सीताँ पूजी सुरसरी। बहु प्रकार पुनि चरनन्हि परी।।
English explanation
Then Sita worshipped the Ganges in many ways and bowed at her feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| सीताँ | सीता ने | Sita |
| पूजी | पूजा की | worshipped |
| सुरसरी | गंगा की | the Ganges |
| बहु | अनेक | many |
| प्रकार | प्रकार से | in ways |
| पुनि | फिर | then |
| चरनन्हि | उनके चरणों में | at her feet |
| परी | गिरकर प्रणाम किया | fell in reverence |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 902
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान · श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 901, 902
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।