लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
जनि जल्पना करि सुजसु नासहि नीति सुनहि करहि छमा।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दव्यर्थ बकवाद करके अपने सुन्दर यशका नाश न करो। क्षमा करना, तुम्हें नीति सुनाता हूँ, सुनो! संसारमें तीन प्रकारके पुरुष होते हैं—पाटल (गुलाब), आम और कटहलके समान। एक (पाटल) फूल देते हैं, एक (आम) फूल और फल दोनों देते हैं और एक (कटहल) में केवल फल ही लगते हैं। इसी प्रकार [पुरुषोंमें] एक कहते हैं [करते नहीं], दूसरे कहते और करते भी हैं और एक (तीसरे) केवल करते हैं, पर वाणीसे कहते नहीं।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 863 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जनि जल्पना करि सुजसु नासहि नीति सुनहि करहि छमा।
संसार महँ पूरुष त्रिबिध पाटल रसाल पनस समा॥
एक सुमनप्रद एक सुमन फल एक फलइ केवल लागहीं।
एक कहहिं कहहिं करहिं अपर एक करहिं कहत न बागहीं॥
स्रोत अभिलेख 6.9 · पुस्तक पृ. 862, 863
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1जनि जल्पना करि सुजसु नासहि नीति सुनहि करहि छमा।
English explanation
Do not ruin your good name by boasting; listen to sound counsel and forgive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनि | मत | do not |
| जल्पना | डींग हाँकना; व्यर्थ की बड़ी बातें | boasting; empty talk |
| करि | करके | by doing |
| सुजसु | अपना अच्छा यश | your good reputation |
| नासहि | नष्ट करो | destroy |
| नीति | नीति की बात; उचित आचरण का उपदेश | sound counsel on proper conduct |
| सुनहि | सुनो | listen to |
| करहि | करो | show; exercise |
| छमा | क्षमा | forgiveness |
2संसार महँ पूरुष त्रिबिध पाटल रसाल पनस समा॥
English explanation
People in the world are of three kinds, like the flowering pāṭal tree, the mango tree, and the jackfruit tree.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संसार | संसार | the world |
| महँ | में | in |
| पूरुष | मनुष्य | people |
| त्रिबिध | तीन प्रकार के | of three kinds |
| पाटल | पाटल का फूलदार वृक्ष | the flowering trumpet-flower tree |
| रसाल | आम का वृक्ष | the mango tree |
| पनस | कटहल का वृक्ष | the jackfruit tree |
| समा | के समान | like; comparable to |
3एक सुमनप्रद एक सुमन फल एक फलइ केवल लागहीं।
English explanation
One yields flowers alone, one bears both flowers and fruit, and one bears fruit alone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक प्रकार का वृक्ष | one kind of tree |
| सुमनप्रद | फूल देने वाला | yielding flowers |
| एक | एक अन्य प्रकार का वृक्ष | another kind of tree |
| सुमन | फूल | flowers |
| फल | फल | fruit |
| एक | एक तीसरे प्रकार का वृक्ष | a third kind of tree |
| फलइ | फल ही | fruit alone |
| केवल | केवल | only |
| लागहीं | लगते हैं | grow; are borne |
4एक कहहिं कहहिं करहिं अपर एक करहिं कहत न बागहीं॥
English explanation
Some only talk; others both talk and act; still others act without occupying themselves with talk.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | कुछ लोग; एक प्रकार के मनुष्य | some people; one kind |
| कहहिं | कहते हैं | talk |
| कहहिं | कहते हैं | talk |
| करहिं | करते हैं | act |
| अपर | दूसरे लोग | others |
| एक | कुछ अन्य लोग; तीसरा प्रकार | still others; a third kind |
| करहिं | करते हैं | act |
| कहत | कहने में; बोलते हुए | in talking |
| न | नहीं | not |
| बागहीं | लगे रहते; उलझते हैं | occupy themselves; get caught up |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 863
- सहायक विषय
- इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 862, 863
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।