लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
कहँ रामु कहि सिर निकर धाए देखि मर्कट भजि चले।
मूल पाठ
कहँ रामु कहि सिर निकर धाए देखि मर्कट भजि चले।
संधानि धनु रघुबंसमनि हँसि सरन्हि सिर बेधे भले॥
सिर मालिका कर कालिका गहि बृंद बृंदन्हि बहु मिलीं।
करि रुधिर सरि मज्जनु मनहुँ संग्राम बट पूजन चलीं॥
स्रोत अभिलेख 6.93 · पुस्तक पृ. 866, 867
भावार्थ
मूल पाठ के बाद'राम कहाँ हैं? यह कहकर सिरोंके समूह दौड़े, उन्हें देखकर वानर भाग चले। तब धनुष सन्धान करके रघुकुलमणि श्रीरामजीने हँसकर बाणोंसे उन सिरोंको भलीभाँति बेध डाला। हाथोंमें मुण्डोंकी मालाएँ लेकर बहुत-सी कालिकाएँ झुंड-की-झुंड मिलकर इक_ी हुईं और वे रुधिरकी नदीमें स्नान करके चलीं, मानो संग्रामरूपी वटवृक्षकी पूजा करने जा रही हों।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 867 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1कहँ रामु कहि सिर निकर धाए देखि मर्कट भजि चले।
English explanation
AI-draft meaning: Groups of heads rushed forward, saying, “Where is Rama?” Seeing them, the monkeys fled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहँ | कहाँ | where |
| रामु | राम | Rama |
| कहि | कहकर | saying |
| सिर | सिरों के | of heads |
| निकर | समूह | groups |
| धाए | दौड़े | rushed forward |
| देखि | देखकर | seeing them |
| मर्कट | वानर | monkeys |
| भजि | भागकर | fleeing |
| चले | चले गए | went away |
2संधानि धनु रघुबंसमनि हँसि सरन्हि सिर बेधे भले॥
English explanation
Rama, the jewel of Raghu’s lineage, readied his bow and, smiling, thoroughly pierced those heads with arrows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संधानि | साधकर | readying |
| धनु | धनुष | the bow |
| रघुबंसमनि | रघुवंश के मणि, राम | Rama, jewel of Raghu’s lineage |
| हँसि | हँसकर | smiling |
| सरन्हि | बाणों से | with arrows |
| सिर | सिरों को | the heads |
| बेधे | बेध दिया | pierced |
| भले | भली तरह | thoroughly |
3सिर मालिका कर कालिका गहि बृंद बृंदन्हि बहु मिलीं।
English explanation
Many fierce goddess-forms gathered in group after group, holding garlands of heads in their hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिर | सिरों की | of heads |
| मालिका | माला | garlands |
| कर | हाथों में | in their hands |
| कालिका | काली के उग्र देवी-रूप | fierce forms of the goddess Kali |
| गहि | पकड़कर | holding |
| बृंद | झुंड | group |
| बृंदन्हि | झुंडों में | in groups |
| बहु | अनेक | many |
| मिलीं | एकत्र हुईं | gathered |
4करि रुधिर सरि मज्जनु मनहुँ संग्राम बट पूजन चलीं॥
English explanation
Having bathed in the river of blood, they seemed to set out to worship the battle imagined as a banyan tree.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| रुधिर | रक्त की | of blood |
| सरि | नदी में | in the river |
| मज्जनु | स्नान | bathing |
| मनहुँ | मानो | as though |
| संग्राम | संग्रामरूपी | battle imagined as |
| बट | वटवृक्ष | a banyan tree |
| पूजन | पूजा करने | to worship |
| चलीं | चलीं | set out |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.93
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 867
- सहायक विषय
- इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 866, 867
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।