लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
अति हरष मन तन पुलक लोचन सजल कह पुनि पुनि रमा।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीजानकीजीके हृदयमें अत्यन्त हर्ष हुआ। उनका शरीर पुलकित हो गया और नेत्रोंमें [आनन्दाश्रुओंका] जल छा गया। वे बार-बार कहती हैं—हे हनुमान्! मैं तुझे क्या दूँ? इस वाणी (समाचार) के समान तीनों लोकोंमें और कुछ भी नहीं है! [हनुमान्जीने कहा—] हे माता! सुनिये, मैंने आज नि:सन्देह सारे जगत्का राज्य पा लिया, जो मैं रणमें शत्रुसेनाको जीतकर भाईसहित निर्विकार श्रीरामजीको देख रहा हूँ।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 885 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अति हरष मन तन पुलक लोचन सजल कह पुनि पुनि रमा।
का देउँ तोहि त्रैलोक महुँ कपि किमपि नहिं बानी समा॥
सुनु मातु मैं पायो अखिल जग राजु आजु न संसयं।
रन जीति रिपुदल बंधु जुत पस्यामि राममनामयं॥
स्रोत अभिलेख 6.107 · पुस्तक पृ. 884, 885
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1अति हरष मन तन पुलक लोचन सजल कह पुनि पुनि रमा।
English explanation
AI-generated interpretive draft: With great joy in her heart, her body thrilled and her eyes filled with tears, Sita speaks repeatedly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| हरष | हर्ष; आनंद | joy |
| मन | मन में | in the heart |
| तन | शरीर में | in the body |
| पुलक | रोमांच | a thrill making the hair stand on end |
| लोचन | आँखें | eyes |
| सजल | आँसुओं से भरी | filled with tears |
| कह | कहती हैं | says |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| रमा | सीताजी | Sita |
2का देउँ तोहि त्रैलोक महुँ कपि किमपि नहिं बानी समा॥
English explanation
Hanuman, what can I give you? In all three worlds, nothing equals this good news.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| का | क्या | what |
| देउँ | मैं दूँ | shall I give |
| तोहि | तुम्हें | to you |
| त्रैलोक | तीनों लोक | the three worlds |
| महुँ | में | in |
| कपि | हे वानर हनुमान | O Hanuman, the monkey hero |
| किमपि | कुछ भी | anything at all |
| नहिं | नहीं | not |
| बानी | इस वाणी अथवा शुभ समाचार के | this utterance or good news |
| समा | समान | equal to |
3सुनु मातु मैं पायो अखिल जग राजु आजु न संसयं।
English explanation
Listen, Mother! Today I have gained, as it were, sovereignty over the whole world; there is no doubt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनिए | listen |
| मातु | हे माता | O Mother |
| मैं | मैंने | I |
| पायो | प्राप्त किया है | have gained |
| अखिल | समस्त | entire |
| जग | जगत का | of the world |
| राजु | राज्य | sovereignty |
| आजु | आज | today |
| न | नहीं | no |
| संसयं | संदेह | doubt |
4रन जीति रिपुदल बंधु जुत पस्यामि राममनामयं॥
English explanation
For I see Rama safe and well with his brother Lakshmana, having defeated the enemy army in battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रन | युद्ध में | in battle |
| जीति | जीतकर | having defeated |
| रिपुदल | शत्रुओं की सेना को | the enemy army |
| बंधु | भाई लक्ष्मण | his brother Lakshmana |
| जुत | के साथ | accompanied by |
| पस्यामि | मैं देखता हूँ | I see |
| राममनामयं | सकुशल, निरोग राम को | Rama, safe and free from illness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.107
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 885
- सहायक विषय
- विभीषणका राज्याभिषेक
- मुद्रित पृष्ठ
- 884, 885
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।