लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर। भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर।।
मूल पाठ
अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर। भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर।।
काम क्रोध मद गज पंचानन। बसहु निरंतर जन मन कानन।।2।।
स्रोत अभिलेख 6.115 · पुस्तक पृ. 895, 895
भावार्थ
मूल पाठ के बादआप निर्गुण, सगुण, दिव्य गुणोंके धाम और परम सुन्दर हैं। भ्रमरूपी अन्धकारके [नाशके] लिये प्रबल प्रतापी सूर्य हैं। काम, क्रोध और मदरूपी हाथियोंके [वधके] लिये सिंहके समान आप इस सेवकके मनरूपी वनमें निरन्तर निवास कीजिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 895 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर। भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर।।
English explanation
You are both beyond attributes and endowed with attributes, a beautiful abode of virtues; your mighty radiance is the sun that dispels the darkness of delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अगुन | गुणों से परे, निर्गुण | beyond attributes |
| सगुन | गुणों से युक्त, सगुण | endowed with attributes |
| गुन | सद्गुणों के | of virtues |
| मंदिर | धाम | abode |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| भ्रम | भ्रम | delusion |
| तम | अंधकार | darkness |
| प्रबल | प्रचंड | mighty |
| प्रताप | तेज | radiance |
| दिवाकर | सूर्य | sun |
2 काम क्रोध मद गज पंचानन। बसहु निरंतर जन मन कानन।।2।।
English explanation
You are a lion to the elephants of desire, anger, and pride. Dwell forever in the forest of your devotees’ minds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काम | कामना | desire |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| मद | अहंकार | pride |
| गज | हाथी | elephants |
| पंचानन | सिंह | lion |
| बसहु | निवास कीजिए | please dwell |
| निरंतर | सदा | always |
| जन | भक्तों के | of devotees |
| मन | मन | minds |
| कानन | वन में | in the forest |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 895
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 895, 895
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।